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Saturday, 6 December 2014
Thursday, 5 June 2014
Photos of CCE Module Revision Workshop organised by SCERT, Lucknow: 27-31 May 2014
SCERT उत्तर प्रदेश द्वारा शैक्षिक वर्ष २०१३-१४ के विद्यालयी अनुभवों के आधार पर सतत एवं व्यापक मूल्याङ्कन हस्तपुस्तिका एवं विभिन्न प्रारूपों की पुनः समीक्षा की गयी. कार्यशाला के दौरान सभी सन्दर्भ व्यक्तियों के लिए यह चुनौती थी कि किस प्रकार सतत एवं व्यापक मूल्याङ्कन की मूल भावना को बनाये रखते हुए प्रारूपों को सरल बनाया जा सके जिससे शिक्षकों को इसे भरने में परेशानी न आये. इस कार्यशाला में विद्यालयों के शिक्षकों ने ही मुख्य सन्दर्भ व्यक्तियों के रूप में सतत एवं व्यापक मूल्याङ्कन हस्तपुस्तिका एवं विभिन्न प्रारूपों की समीक्षा की.
इस प्रयास में कितनी सफलता मिली, यह तो हमारे शिक्षक ही बता पायेंगे.
आपके अवलोकनार्थ इस कार्यशाला की कुछ छवियाँ...
Thursday, 13 March 2014
Friday, 7 February 2014
''लड़ार्इ बाकी है''
ऐ नौजवानों उठो,
लड़ार्इ बाकी है
अभी,
इस देश के
रणक्षेत्र में,
लड़ार्इ बाकी है अभी।
तैयार करो इस देश
को,
क्योंकि बुरार्इ
बाकी है अभी,
नेताओं का
वर्चस्व है,
नेतृत्व बाकी है
अभी।
हर तरफ है,
स्वार्थ पड़ा,
मानवता बाकी है अभी,
पढ़ लिये,
पढ़ा लिये,
पर शिक्षा बाकी
है अभी।
ऐ रणवीरो चलो
कर्मक्षेत्र में,
देखो इस देश में,
कहीं-कहीं
जागरूकता बाकी है अभी।
स्वतंत्रता तो
मिल गर्इ, इस देश को,
आजादी बाकी है
अभी,
तिरंगा तो लहरा
लिए,
पर रंगों का मेल
बाकी है अभी।
-
प्रीति उपाध्याय
शिक्षा मित्र, प्राथमिक विधालय वार
विकास क्षेत्र-पिण्डरा, वाराणसी
E-mail : preeti14783@gmail.com
Thursday, 2 January 2014
नव वर्ष मंगलमय हो !!!
आप सभी को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!
वर्ष २०१४
आपके जीवन को
सार्थक विचारों, शक्ति, उल्लास व उमंगों
से भर दे,
यही हमारी कामना है...
Monday, 16 December 2013
माटी का दिया
सांध्य रवि ने कहा मेरा काम लेगा कौन
रह गया सुनकर निरुत्तर जगत सारा मौन.
एक माटी के दिये ने कहा विनम्रता के साथ
जितना भी बन पड़ेगा मैं करूँगा नाथ...
रह गया सुनकर निरुत्तर जगत सारा मौन.
एक माटी के दिये ने कहा विनम्रता के साथ
जितना भी बन पड़ेगा मैं करूँगा नाथ...
- गीतांजली से साभार...
Monday, 9 December 2013
सतत एवम व्यापक मूल्यांकन- एक कविता
जो दौड़ लगाकर बैठ गये, वो राहों में रह जाते हैं,
जो चलते रहते सतत यहाँ, निश्चय ही मंजिल पाते हैं।
बच्चों की बहुमुखी प्रतिभा का, बेहतर मापक होता है,
वहीं दूसरो शब्दों में, मूल्यांकन व्यापक होता है।
बच्चों ने कितना सीखा, ये संकेतक बतलाते हैं,
पाठयक्रमीय लक्ष्यों को हासिल, करने के ये नाते हैं।
अब तक मैंने इनता सीखा, जाना या फिर पहचाना,
इसकी सम्यक समझ न जिनको, राहों में रह जाते है।
बहुत जरूरी हम शिक्षक हित, संकेतक का ज्ञान है,
अब प्रकरण पर नहीं, प्रक्रिया पर ही देना ध्यान है।
कितनी हुई प्रगति अब तक, होती इससे पहचान है,
मेरा तो मन्तव्य यहीं, ये सी0सी0ई0 की जान है।
बच्चों की गतिविधियों का जब बेहतर अवलोकन होगा,
तभी आंकलन बिन्दु मिलेंगे, और उनका अंकन होगा।
शिक्षक की डायरी हो या फिर छात्रों की हो प्रोफाइल,
समझ प्रपत्रों पर बनते ही, सम्यक अभिलेखन होगा।
हर बच्चा विशिष्ट है खुद में, इसको हमे समझाना होगा,
है उसकी क्या खास जरूरत, इस पर चिंतन करना होगा।
समय कहे कार्यान्वित हो, व्यक्तिगत योजना शिक्षा की,
मूल्यांकन विधियाँ हों विशिष्ट, ना डर हो कभी परीक्षा की।
हो अगर सफलता की चाहत, मन बचन कर्म से एक बनें,
सी0सी0ई0 सेल कुछ कार्य करें ऐसा, कि हम सब नेक बनें।
जो कर्मठ और उत्साही हों, पा सकें समर्थन नियमित गर,
तो गारण्टी इस बात की है, मंजिल की राह अनेक बने।
राह-ए-मंजिल इफ व बट होता नहीं भाई,
कोई भी कार्य फटाफट, होता नहीं भाई।
खोएं न धैर्य कभी भी, चलते रहें सतत
सफलता का कोई शार्ट कट, होता नहीं भाई।
जिन्दगी भोर है, सूरज सा निकलते रहिए,
नित नवाचार से, खुद को भी बदलते रहिए।
अगर रूक जायेंगे, मंजिल न पा सकेंगे कभी,
धीरे-धीरे ही मगर, अनवरत चलते रहिए।
जो चलते रहते सतत यहाँ, निश्चय ही मंजिल पाते हैं।
बच्चों की बहुमुखी प्रतिभा का, बेहतर मापक होता है,
वहीं दूसरो शब्दों में, मूल्यांकन व्यापक होता है।
बच्चों ने कितना सीखा, ये संकेतक बतलाते हैं,
पाठयक्रमीय लक्ष्यों को हासिल, करने के ये नाते हैं।
अब तक मैंने इनता सीखा, जाना या फिर पहचाना,
इसकी सम्यक समझ न जिनको, राहों में रह जाते है।
बहुत जरूरी हम शिक्षक हित, संकेतक का ज्ञान है,
अब प्रकरण पर नहीं, प्रक्रिया पर ही देना ध्यान है।
कितनी हुई प्रगति अब तक, होती इससे पहचान है,
मेरा तो मन्तव्य यहीं, ये सी0सी0ई0 की जान है।
बच्चों की गतिविधियों का जब बेहतर अवलोकन होगा,
तभी आंकलन बिन्दु मिलेंगे, और उनका अंकन होगा।
शिक्षक की डायरी हो या फिर छात्रों की हो प्रोफाइल,
समझ प्रपत्रों पर बनते ही, सम्यक अभिलेखन होगा।
हर बच्चा विशिष्ट है खुद में, इसको हमे समझाना होगा,
है उसकी क्या खास जरूरत, इस पर चिंतन करना होगा।
समय कहे कार्यान्वित हो, व्यक्तिगत योजना शिक्षा की,
मूल्यांकन विधियाँ हों विशिष्ट, ना डर हो कभी परीक्षा की।
हो अगर सफलता की चाहत, मन बचन कर्म से एक बनें,
सी0सी0ई0 सेल कुछ कार्य करें ऐसा, कि हम सब नेक बनें।
जो कर्मठ और उत्साही हों, पा सकें समर्थन नियमित गर,
तो गारण्टी इस बात की है, मंजिल की राह अनेक बने।
राह-ए-मंजिल इफ व बट होता नहीं भाई,
कोई भी कार्य फटाफट, होता नहीं भाई।
खोएं न धैर्य कभी भी, चलते रहें सतत
सफलता का कोई शार्ट कट, होता नहीं भाई।
जिन्दगी भोर है, सूरज सा निकलते रहिए,
नित नवाचार से, खुद को भी बदलते रहिए।
अगर रूक जायेंगे, मंजिल न पा सकेंगे कभी,
धीरे-धीरे ही मगर, अनवरत चलते रहिए।
Composed by : विन्ध्येश्वरी प्रसाद बिन्ध्य
ए0बी0आर0सी0 पिण्डरा
वाराणसी।
Shard by : मनीष कुमार सिंह, स0अ0
प्रा0वि0- चितर्इपुर, पिण्डरा
वाराणसी।
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